नवरात्रि में रणचंडी के दहाड़ से काँप उठा बीएचयू का सिंह द्वार - शब्दबाण

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Saturday, 23 September 2017

नवरात्रि में रणचंडी के दहाड़ से काँप उठा बीएचयू का सिंह द्वार


यूँ तो बनारस का अपना अलग मिजाज ही है, कहा जाता है शाम-ए-अवध, सुबह-ए-बनारस किन्तु आज़कल बनारस की सुबह काफ़ी गर्म हावाओं की चपेट में है। जहाँ एक तरफ मोदी जी के आगमन से बनारस की सुबह में सरगर्मी है वही बनारस हिन्दु विश्वविधालय का सिंह द्वार आज़कल काफ़ी चर्चा में है। नवरात्रि में माँ दुर्गा की शेरनियों ने दहाड़ लगा दी है, शक्ति स्वरुपा की दहाड़ से सिंह द्वार काँप रहा है।

बनारस विश्वविधालय का एक प्रकरण सामने आया है, सिंह द्वार पर सरगर्मी बयाँ करती है कि नवरात्रि में शक्ति स्वरुपा नारी जागृत हो गयी है। यह मामला बनारस की बेटियों से छेड़खानी का है। सिंह द्वार पर शेरनियों की दहाड़ सुनायी दे रही है सुरक्षा को लेकर, सुरक्षा किसी की बहन का किसी की बेटियों का बनारस विश्वविधालय में बेटियों से छेड़खानी आम बात हो गयी है।



मानवीय संवेदनाएँ इस तरह से मर जायेंगी किसी ने कल्पना तक नहीं किया था। पुराणों में सच ही कहा गया है। कलियुग केवल नाम आधार, सुमिर-सुमिर नर उतरय भवसिन्धु के पारा
कलियुग में नाम ले लो ईश्वर का मोक्ष की प्रात्ति हो जायेगी। क्योकि मानवीय संवेदनाएँ मर गयी है। दूसरों की बहन बेटियाँ अब सिर्फ माॅल है लोगों के लिए, उनका शोषण करना हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है। क्यों न हो नारी सिर्फ भोग की वस्तु है? दूसरों के धरों पर पत्थर वही मारा करते है जिनके धर स्वयं काँच के नहीं बने होते हैं। बनारस विश्वविधालय का मामला सामने तब आया जब विवि. की नारी शक्ति ने छेड़खानी के विरोध में मोर्चा खोल दिया। विवि. की छात्रा आकाँक्षा सिंह के साथ छेड़खानी की गयी और गालियाँ दी गयी शिक्षा के मन्दिर में देवियों का अपमान पीड़ादायक है। 




बनारस विश्वविधालय शिक्षा का मन्दिर जहाँ लोग संस्कार लेने जाते है, सुसंस्कृत होने जाते है। वहाँ माँ सरस्वती स्वरुपा देवियों का अपमान किसी पीड़ा से कम नहीं है, आज़ समाज का आधारभूत स्तम्भ ही सुरक्षित नहीं है, कैसे एक संस्कारित समाज़ और सभ्य समाज की परिकल्पना की जा सकती हैं। 
एक आदर्श भारत और समृद्ध भारत कि कल्पना तो कपोल कल्पनाएँ ही हो सकती है। 
जिस शिक्षा के मन्दिर में माँ सरस्वती पूज्यनीय हैं, वहाँ देवियों का अपमान वीणावादिनी के चीरहरण से कम नहीं है। यदि आपको ये देविया माॅल लग सकती है, तो कभी वीणावादिनी को आप आँखों पर पर्दा डालकर देखे इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होनी चाहिए। 

लड़कियों ने विवि. प्रशासन को एक प्रार्थना पत्र भी लिखा है, जिसमें उनकी माँगे इस प्रकार है। विवि. में आये दिन लड़कियों से छेड़खानी की जाती है। लड़िकयों का आने-जाने का मार्ग सुरक्षित नहीं है। लड़कियों की सुरक्षा की दृष्टि से कोई सुरक्षा कर्मी की तैनाती नहीं है जिससे लड़कियाँ डर-डर की जी रही है, लड़के आये दिन आपत्तिजनक हरकतें करते है जैसे हस्थमैथुन, गाँली देना, पत्थर फ़ेकना आदि।
सिर्फ़ इतना ही नहीं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की छवि धूमिल हो रही है। उनके साथ भी अभद्रता की जाती है।

                        "अतिथि देवो भव:"


ऐसा आवेदन विवि. के चीफ़ प्राक्टर को भी दिया गया था। किन्तु इस ओर अभी कोई ध्यान नहीं दिया गया है, धरना के दौरान चीफ़ प्राक्टर कि मौजूदगी में छात्रों ने ' कहा कि यह सब बकवास बन्द करो नहीं तो एकाध का रेप हो जायेगा'!
हद तो तब हो गयी जब प्राक्टर ने लड़को पर कोई कार्यवाही करने के बजाए कुटिल मुस्कान बिखेर कर लड़को का समर्थन किया।

             'विश्वविधालय की छात्रा ने बताया की           विवि प्रशासन द्वारा यह कहा जाता है कि शाम         6 बजे तक क्यों बाहर धूमती हो, अपना हक       माँगने पर कहा जाता है, कि अन्दर जाओगी                 या रेप होने तक यही इंतजार करोगी'



ऐसा पहली बार है कि इतनी बड़ी संख्या में छात्राएं सड़कों पर हैं। उनका मकसद है - सुरक्षा। जिसे प्रशासन दबाना चाहता है। लंका पर हो रहे धरने में और छात्राएं शामिल न हो। इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन एक गिरी हुई हरकत को अंजाम दिया। प्रशासन ने छात्राओें की हाॅस्टल में ताले लगवा दिये। जिससे और लड़कियां विरोध में शामिल न हो पाएं।

          छात्राओं का कहना है कि जबसे विश्वविद्यालय में नए कुलपति आये हैं। ऐसी घटनाएं बढ़ गई हैं, क्योंकि कुलपति ऐसी घटनाओं पर अधिक ध्यान नहीं देते हैं। लेकिन इस बार उनका कहना है कि वे अपना हक लेकर रहेंगी। उनको रोकने के लिए प्रशासन ने अपने दांव खेले हैं।



नवरात्रि में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की नारी जाग गई हैं। उन्हें कोई धमकी मिले या मार भी दिया जाए। वो अपने हक के लिए लड़ती रहेंगी। इसके के बीए की छात्रा ने विरोध करने के लिए अपने बाल मुंडवा दिए हैं। छात्राएं सुबह से ही विरोध कर रही हैं। लेकिन प्रशासन पर जूं तक नहीं रेंगी है।


 शर्मशार हुआ मोदी का संसदीय क्षेत्र-: 

बनारस देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का क्षेत्र है, जो लगातार सुर्खियों में रहता है। किन्तु इसबार वजह कुछ और ही है, बनारस का सिंह द्वार आजकल बीएचयू की छात्राओं की दहाड़ से काँप रहा है। इस बार मोदी का संसदीय क्षेत्र शर्मसार हुआ है बेटियों की मर्यादा को लेकर जहाँ एक ओर देश के प्रधानमंत्री माँ भारती को अपनी माँ कहते है, महिलाएँ उनके लिए देवी समान है, मोदी जी माँ दुर्गा के उपासक है। और नवरात्रि में माँ आदि शक्ति की उपासना करते है। वही उनही के संसदीय क्षेत्र में माँ आदि शाक्ति  स्वरुप नारी शक्ति के साथ अभद्रता की गयी है। अब देखने योग्य यह है, कि क्या ? नारी शक्ति को उचित न्याय और सम्मान देकर मोदी जी नवरात्रि का फलाहार करेगें या यह सिर्फ़ कोरी कल्पना सिद्ध होगी।


एंटी-रोमियों‌ की खुली पोल-:

जब से प्रदेश में योगी सरकार आयी है, तब से प्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकार द्वारा अनेकों उपाय किये गये है। प्रदेश कि महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिए  एंटी-रोमियों दल, महिला सुरक्षा हेल्पलाइन, 181 महिला हेल्पलाइन, 1090 वुमेन पावर लाइन जैसी व्यवस्था की गयी है।  
किन्तु जिस प्रकार से आये दिन महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की धटनाएँ बढ़ रही है, उससे सरकार की सुरक्षानिति कटधरे में खड़ी दिखायी दे रही है। योगी जी और मोदी जी में एक बात समान है कि दोनों माँ आदिशक्ति के उपासक है, अब देखना यह है कि क्या ? शक्ति स्वरुपा को उचित न्याय और सम्मान मिल पाता है या नहीं ?


प्रधानमंत्री मोदी अभी बनारस दौरे पर हैं। आज वो जिस रूट से गुजरने वाले थे। वहां छात्राएं विरोध कर रही थी, शायद इसलिए उनका जाने का रूट बदल दिया गया।

जब हम नारी की बात करते हैं, तो सम्मान से देखते हैं। लेकिन जब ऐसे प्रकरण सामने आते हैं। तो वे मोदी यात्रा के सामने फीके पड़ जाते हैं। न ही स्थानीय और न ही राष्ट्रीय मीडिया इस प्रकरण को लाने की कोशिश कर रही है। मीडिया को चाहिए कि वह टीआरपी को होड़ छोड़कर अपने दायित्व को सही से दिखाए। खबरें वो दिखाए, जिसको जानकर किसी का भला हो सकता है तो किसी का भविष्य सुधर सकता है।
 

अगर प्रकरण टी.वी और अखबारों की हेडिंग बना तो क्या होगा? प्रशासन पर कार्यवाही की जाएगी। ये लड़किया पूरे समाज के लिए एक रोल माॅडल बनकर उभरेगी। जब ऐसा हो सकता है तो मीडिया का तो यह काम ही है। समाज में बदलाव की अलख जगाना।


साभार-: http://www.repta.wordpress.com
साभार-: विपुल वैभव पत्रकारिता एवं जनसंचार देसविवि.
                  


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