परिवर्तन के पुरोधा आईएएस नीतीश कुमार( the pioneer of revolution nitesh Kumar) - शब्दबाण

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Thursday, 15 June 2017

परिवर्तन के पुरोधा आईएएस नीतीश कुमार( the pioneer of revolution nitesh Kumar)




परिवर्तन के पुरोधा यह शब्द आपने शायद पहले भी सुना होगा। किन्तु आप सोच रहे होंगे यह शब्द तो स्वामी विवेकानन्द जी के व्यक्तित्व को‌ चरित्रार्थ करता है। किन्तु परिवर्तन का पुरोधा वह हर कोई है जो इस शून्य को साकार रुप‌ देने का साहस रखता हो। 

The pioneer of revolution  nitish Kumar

परिवर्तन के पुरोधा नीतीश कुमार इनकें बारे में लिख़ने के लिए मेरे पास शब्दकोश नहीं है, बात जब ऐसे व्यक्तित्व की हो तो लेख़नी और शब्दकोष के मध्य संधर्ष विनिर्गित है। 

कुछ पंक्तियाँ याद आ रही है-: युवा बदलते है, तो सारे मंजर सारे अंजाम बदल जाते है।


कौन कहता है भगत सिंह पैदा नही होते पैदा तो होते है बस नाम बदल जाते है।।

जिस प्रकार से भक्त सिंह ने क्रान्ति की बिगुल बजायी थी, ठीक उसी प्रकार आईएएस नीतीश कुमार जी ने शिक्षा क्रांति की बिगुल बजा दी है। यूँ तो समाज में बहुत सारे बदलाव हुए है, हर युग में एक मसीहा अवश्य आता है जो परिवर्तन की इबारत लिखता है, हमारे देश की सबसे गूढ़ समस्या शिक्षा रही है, वैसे तो देश में बहुत बड़े-बड़े मुद्दें है जिनमे बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, शिक्षा प्रमुख मुद्दें है, किन्तु शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है पुराणों में भी शिक्षा विहीन पुरुष को पशु समान बताया गया है।

शिक्षा के बिना देश के सर्वांगीण विकास की परिकल्पना भी नहीं की जा सकती है, यदि माँ भारती को पुनः विश्वगुरु बनाना है तो यहाँ के प्रत्येक ईंट का सही नियोजन करना पड़ेगा। वो ईंट कोई और नहीं हमारे ननिहाल है जो देश का भविष्य है आधारभूत स्तम्भ है। इन्ही ईटों का सही संयोजन सही निगमन राष्ट्र को विश्व के मानस पटल पर ले जायेगा।


हम युवाओं के मार्गदर्शक प्रणेता आईएएस नीतीश कुमार जी ने इस कार्य का बीणा अपने कंधों पर उठाया है। मैं व्यक्तिगत तौर पर तो उनसें नहीं मिला हूँ लेकिन एक कहावत है कि व्यक्ति की पहचान उसके व्यक्तित्व से नहीं उसके कर्मों से होती है कर्म प्रधान व्यक्ति की खुश्बू से सारा राष्ट्र सरोबोर हो जाता है। भारत सिर्फ़ एक देश नहीं है, भारत सिर्फ़ एक राष्ट्र नहीं है न ही भारत एक नाम है, भारत सृष्टि का संरक्षक है भारत जगत गुरु है, समस्त संस्कृतियों का तात है, पालनकर्ता है, हमारी संस्कृति की खुश्बू ने पूरे विश्व को दिशा प्रदान किया है।
हमारी शिक्षा प्रणाली ने पूरे विश्व को कूटनीति, राजनीति का ककहरा सिखाया है, तक्षशिला, नालंदा जैसा अनूठा विश्वविधालय सिर्फ़ भारत जैसे पालनकर्ता राष्ट्र में ही हो सकता है जहाँ से निकली ज्ञानरुपी सुरम्यता ने समग्र विश्व को शिक्षा के धाँगे में पिरोने का कार्य किया है। 

परिवर्तन के पुरोधा आईएएस नीतीश कुमार( the pioneer of revolution)




प्राचीन शिक्षा पद्धति तक्षशिला, नालांदा जैसे गुरुकुल को पुर्नस्थापित करने का कार्य नीतीश कुमार जी ने किया जब वह लखी़मपुर के सीडीओ पद पर थे उस समय उन्होंने अनेकों नवीन पद्धतियों को समाज की मुख्यधारा में प्रतिरोपित करने का कार्य किया। एमडीएम सेट के साथ पशु प्रेम को भी जगजाहिर किया। उन्होंने भैसों के तबेलों का रंगरोगन करवाकर लोगों को पशु प्रेम के प्रति जागरुक किया।

माध्यांह भोजन में उच्च गुणवत्ता का मूल मंत्र लोगों‌ के मध्य प्रतिरोपित किया।
श्रावस्ती अपनी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के लिए जाना जाता है, जहाँ प्राचीन मठ के साथ महात्मा बुद्ध, अंगुलीमाल गुफ़ा मुख्य केन्द्र बिन्दु है जब श्रीमान जी श्रावस्ती जि़ला में जिलाधिकारी के पदभार पर नियुक्त हुए तो समाज को एक नया साहस नयी दिशा मिली, उसी अनुभूति को स्फुरण करके समाज को मुख्यधारा से जोड़नें के कार्य का अनावरण हुआ जो जिलाधिकारी रहने तक लगातार अनवरत रहा। 

जब प्रकाशपुंज, प्रेरणापुंज मार्ग प्रशसस्त कर रहा हो तो असंख्य उदीप्त प्रज्जवलित होकर समाज को अवश्य अंधकार मुक्त कर देते है, आईएएस नीतीश कुमार जी ने तक्षशिला, नालांदा को श्रावस्ती में पुर्नस्थापित करने का प्रयास किया जो उनका गृहजनपद भी है। श्रीमान जी ने प्राथमिक विधालयों को काॅन्वेंट स्कूल के तर्ज़ पर विकसित करने का कार्य किया। जो आज़ भी श्रावस्ती में देखे जा सकते है। नीतीश जी ने शिक्षा की महत्ता को भाँपकर देश के ईंटो को संग्रहित करने का कार्य किया आज़ देश के ननिहाल कजरियाँ ब्रांड लगी टाईल्स पर बैठकर देश के उज्जवल भविष्य के संपने साकार करने की ओर अग्रसर है। 

सर के बारे में चन्द लाईनें याद आ गयी 
ज़िन्दगी के कई अरमान बाकी है, ज़िन्दगी के कई इम्तिहान बाकी है।

अभी तो नापी है मुठ्ठी भर जमीन हमने अभी तो सारा असमान बाकी है।।


अभी तो पूरा असमान नापना है, इसका शंख्नाद भी हो चुका है। नीतीश कुमार जी ने श्रावस्ती जैसे अतिपिछड़े जिले में पब्लिक लाईब्रेरी का शुभारम्भ किया जिससे युवा, वयोवृद्ध अपने जिले में ही रहकर देश-दुनिया के साथ जुड़ सके एवं विकास की मुख्यधारा से अपने को अपेक्षित महसूस न करें।
उन्होंने ग्राम के युवा को ग्राम में ही रोजगार का संकल्प लोगो को दिलवाया ताकि कोई युवा पलायन करके रोजगार के लिए शहर की गलियों की धूल न खाये। उन्होंने श्रावस्ती जिले में ऐसा माॅडल विकसित किया जो गाँव के युवा को गाँव में ही रोजगार दिलवा सके। श्रावस्ती जिले को सबसे तेज विकसित करने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा पुरस्कृत किया गया। इन सब कार्यों के लिए सर ने कोई सरकारी मद नहीं लिया ये सारा कार्य देवतुल्य आत्मा के प्रेरणा और मार्गदर्शन से संपन्न हुआ। ग्राम सभा के प्रधानों को प्रोत्साहित करके समाज मे नूतन संचार करने का पूरा श्रेय आपको जाता है, आपने जो दीप प्रज्जवलित किया है वह सदैव उद्दपित होता रहेगा।

परिवर्तन के पुरोधा आईएएस नीतीश कुमार( the pioneer of revolution)

आज तक के संवाददाता आदरणीय रामबरन चौधरी के शब्दों में

बेहद शांत बेमतलब ताम झाम से दूर सिर्फ अपने काम को अंजाम देने में माहिर प्राथमिक शिक्षा को कान्वेंट के पैटर्न पर करने का जुनून पाले युवा आई ए एस पूर्व जिलाधिकारी नीतीश कुमार का जब श्रावस्ती जिले के जिलाधिकारी पद से तबादला हुआ तो व्यक्तिगत तौर पर मुझे जितनी निराशा हुई थी शायद ऐसा कुछ उन हजारो नौनिहालों को भी हुआ होगा जो अब अपने प्राइमरी स्कूल में कजारिया ब्रांड लगी टाइल्स की फर्श पर बिना टाट पट्टी के भी बैठ कर पढ़ सकते हैं। 
श्रावस्ती जिले की ग्राम पंचायतों में उनके कार्यकाल में खोले गए ज्ञान केंद्र (पंचायत लाइब्रेरी) में बैठ कर देश दुनिया की जानकारी ले रहे उन तमाम बूढ़े, नवजवानों को भी ऐसी निराशा हाथ लगी होगी जिन्होंने सपने में भी शायद न सोंचा हो कि देश के सबसे पिछड़े जिले श्रावस्ती के गांवो में पब्लिक लाइब्रेरी देखने को मिलेगी लेकिन नीतीश जी ने दुनिया भर में मशहूर भारत की प्राचीन शिक्षा केंद्र का गौरव बिहार के नालन्दा तक्षशिला (जो नीतीश जी का गृह जनपद भी है) की तर्ज पर वैसे ही मॉडल श्रावस्ती के गांवों में भी बनाने की शुरुआत की थी जो आज भी श्रावस्ती की ग्राम पंचायतों में देखे जा सकते हैं। 
पिछले दिनों नीतीश कुमार को जब सरकारी रूटीन ट्रांसफर के चलते श्रावस्ती के जिलाधिकारी पद से हटाया गया तो एक क्षण ऐसा लगा कि अब शायद श्रावस्ती का विकास अवरुद्ध हो जाये जिस श्रावस्ती को नीतीश जी के कार्यकाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के हाथों सबसे तेजी से विकास करने वाले जिले के रूप में चयनित कर पुरस्कृत किया गया अब वहां शायद ही कुछ नया हो सके। लेकिन कल शाम जब ये सुनने का अवसर मिला कि नीतीश जो को अब मुख्यमंत्री का विशेष सचिव बनाया दिया गया है तो मन मे अपार प्रसन्नता हुई, वो इसलिए नही की नीतीश जी मुख्यमंत्री के बेहद करीबी हो गए बल्कि इसलिए कि ग्रामीण क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था समेत तमाम विकासपरक योजनाओं को जरूरतमंद के बीच पहुंचाने का जो विजन जो जुनून हमने नीतीश सर की आंखों में देखा है अब उसकी परख विशेष सचिव होने के नाते मुख्यमंत्री योगी को आसानी से हो सकेगी। अब नीतीश सर का विजन श्रावस्ती की तर्ज पर पूरे यू पी में साकार रूप ले सकेगा। 



सर, नई आशाओं के साथ एक बेहतर कल का सपना संजोये समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा हर वो इंसान आज आपको बधाई दे रहा है जिसकी जरूरत को आपने अपना मकसद बनाया...


सर अभी तो समुन्दर खामोश था, अभी तो लहरे साहिल से टकरायी है, बस अब तूफ़ान आना बाकी है।


आदरणीय नीतीश सर को मुख्यमंत्री योगी का विशेष सचिव नियुक्त किया है। यह पूरे प्रदेशवासियों के लिए गर्व के क्षण है
इन क्षणों‌ में हम स्वयं गौरवान्तित महसूस कर रहे है। हमें आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि आपने जो विजन देखा है, उसे विशेष सचिव रहते हुए और सही ढंग से नियोजित करेंगे। योगी के साथ रहते हुए उन्हे आपके विजन को और नजद़ीक से देखने का और क्रियान्वित करने का अवसर मिलेगा। सर हम आपसे आपेक्षा करते है कि शिक्षा के माध्यम से शोषित और गरीब वर्ग को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य करे, ताकि समाज के निचले पायदान पर खड़ा वह हर व्यक्ति अपने को सशक्त और समृद्ध महसूस कर सके जो विकास की मुख्यधारा से कोशों दूर है। 

आप जैसे देव तुल्य आत्मा, युवाओं के मार्गदर्शक, प्रणेता को हद्धय के न्यून्तम बिन्दु से चरणबंदन, आपका आशिर्वाद हमारा चरणामृत है।
स्वामी विवेकानन्द जी ने कहा है-: 
समाज का प्रत्येक मनुष्य तक तक मनुष्य कहलाने के योग्य नही, जब तक दूसरे के पुत्र के दर्द को अपने पुत्र के दर्द के समान न समझे।।

परिवर्तन के पुरोधा आईएएस नीतीश कुमार(the pioneer of revolution)










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