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Sunday, 4 June 2017

नैंसी को न्याय चाहिए JUSTICE FOR NANCY क्योकि वह आपकी बेटी नहीं है?

मैनें जिस विश्वविधालय से पढ़ाई की ऊहा एकै बात सिख़ाई गयी की हम बदलेगें युग बदलेगा। अर्थात युग को बदलने की अवश्यकता ही नहीं है, हम स्वयं बदल जाये तो युग भी बदल जायेगा। कुछ इसी तरह हमारी मानसिकता भी है, कहते है समाज़ आधुनिक हो गया है। लड़कियाँ छोटे-छोटे कपड़े पहनने लगी है इसी की वज़ह से बलात्कार जैसे जधन्य अपराध बढ़ते जा रहे है।
हाँ सही तो कहत हो भैय्या लड़कियाँ छोटे कपड़े पहन रही है यही से बलात्कार हो रहे है, और जो तुम्हारे दिमाग में भूषा भरा है ऊका का ये भी तो बताओं यार छोटे-या बड़े कपड़े पहनने से कुछ नही होता है। अपनी मानसिकता बदलों। जिस दिन मानसिकता रुपी आवरण को उतार कर फेक दोगे माँ कसम आईना भी बहुत खूबसूरत शक्ल दिखायेगा। महिलाएँ सिर्फ़ भोग की वस्तु नहीं है हमें अपनी सोच के दायरे को और वृहद करना होगा। बुराई छोटे कपड़ों में नहीं है बुराई हमारे डीएनए और मानसिकता में है, इसलिए इसे बदलने की अवश्यकता है। हम अपनी माँ, बहन, बेटियों के प्रति नकारात्मक विचार क्यो नहीं लाते क्योकि हमारी मानसिकता हमारा नज़रियाँ उन्के प्रति वैसा नहीं है।
Directory dubmission list   और हाँ दूसरो के धर पर पत्थर वही फ़ेका करते है, जिन्के धर काँच के न हो। माँ कसम दुनियाँ में 99 % मर्द ऐसे होगें जिनके अशियाने शीशे के ही बने होगें। फ़िर नारी पर ये अत्याचार क्यो, क्यो हम नारी को सिर्फ़ हवश की नजर से भोग की नजर से देखते है। जबकि नारी से हम है यह श्रृष्टि है वही हमारा भरण-पोषण करने वाली है।

ख़ैर हमारे शब्दो के बाण से आप पर कोई फ़र्क नहीं पड़ने वाला

हम तब तक सर्वश्रेष्ठ मुनुष्य नहीं कहला सकते जब तक दूसरे को पुत्र को चोट लगने पर हमे स्वयं के पुत्र को लगी चोट जैसा अनुभव न हो।

इस बात की सत्यता को देख़ा जाये तो यह बात सौ फ़ीसदी सत्य है।

Directory dubmission list आज के समय में हर इंसान को रस लेने में बड़ा आनन्द आता है, कोई बातों का रस ले रहा है। कोई जाम का रस ले रहा है, कोई कहानियों और चटकारों का रस ले रहा है-

आईए एक कहानी सुनाते है इसका भी रस ले लो क्योकि बात जब अपने बहु-बेटियों की होती है तो वह रस करुण रस में परिवर्तित हो जाता है, किन्तु जब बात दूसरे के बहु-बेटियों की हो तो क्या फ़र्क पड़ता है वह तो हास्य रस और श्रृंगार रस की परिभाषा है।

नैंसी के लिए कोई आवाज उठाने वाला नहीं क्योकि वह आपकी बेटी नहीं है न कही न मोमबत्तियाँ जलायी गयी न ही जुलूस निकला न किसी की अवाज न ही किसी की भाव संवेदना।

प्रतिदिन की तरह उस दिन भी वह धर से स्कूल के लिए निकली थी लेकिन लौटकर नहीं आयी। सुबह-सुबह धर में चहल-पहल हो गयी थी। क्योकि उसके लिए टिफिन बनाना था। अपनी परी को स्कूल भेजना था। कही वह भूख़ी न रह जाये। इसी पशोपेश में एक माँ जददोजहद कर रही थी, इसमें हमे बताने की जरुरत नहीं की आपने भी बचपन में माँ की ऐसी ममता को देखा होगा।
आख़िर माँ तो माँ ही होती है, बचपन में एक बार सड़क पर चलते हुए ठोकर लग गयी थी माँ ने दौड़कर अपने कलेजे के टुकड़े को जिगर से लगा लिया कही मेरे बेटे को चोट तो नहीं लगी।


मैं अब उस उम्र में आ गयी हूँ जहा दर्द क्या होता है महसूस कर सकती हूँ जहाँ एक औरत को दर्द सहने की क्षमता आ जाती है। अगर चीख़ कर रोना है तो मुहँ में कपड़े ठूसकर रो लेना नहीं तो कही बगल वाले की नींद न हराम हो जाये। एक दिन रोटी सेकते हुए तवे से हाथ छू गया मुँह से जोरो की चीख़ निकल गयी। एक भूरा दाग निकल आया हो शायद तीन दिन मे ठीक हो जायेगा। लेकिन यह ऐसा दाग है जो ज़िन्दगी भर नही छूटेगा।

आप भी कभी सिगरेट, लाईटर, बीड़ी से जले होगे, मै अभी कुछ दिन पहले मोटर साइकिल के साईलेन्सर से जला था मुँह से चीख़ निकल गयी थी सोचो कितना दर्द होता होगा। उस दर्द को १००० गुना कर लो  मै तो सोच भी नही सकता यह हमारे परिकल्पना से परे है।

12 साल की नैंसी को तेजाब से जलाया गया, उसके पहले उसका गर्दन रेता गया। उसकी नसें काटी गयी उसका बलात्कार किया गया। कितना निर्मम कितनी दरिंदगी ऐसे कौन से राक्षस इस समाज़ में पैदा होने लगे। उसके माता-पिता पर क्या बीत रही होगी, ऊपर की लाइनों से अंदाजा लगाया जा सकता है। उस बच्ची की तस्वीर देखकर लगता है मानों किसी नरभक्षी ने कलेजे में दाँत गड़ा दिये है।


यह असल नरभक्षी है, जो उसके ऊपर चढ़े हुए माँस का सेवन कर रहे थे। मेरा तो मस्तिष्क ही शून्य हो गया है, मैं तो अवचेतन हो गया हूँ। जड़ हो गया हूँ मेरी कल्पना शक्ति ने तो जवाब दे दिया है आप ही कल्पना करो कितनी दर्द विदारक धटना रही होगी।

यह धटना मधुबनी बिहार की है, बिहार का एक छोटा सा शहर मधुबनी इतना भी छोटा नहीं की चित्रकारियों के बीच अपनी बटियों के सपने न पाल सके। 

नैंसी को मरने वाले आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
मामला कुछ यू था कि नैंसी की बुआ की शादी होने वाली थी। और यह दोनो आरोपी नहीं चाहते थे कि उसकी बुआ कि शादी हो। इसलिए शादी के ठीक एक दिन पहले मेहंदी के रस्म वाले दिन जब वह स्कूल से धर लौट रही थी अपने हाथों में मेहंदी रचाने के लिए दो बाइक सवारों ने 25 म ई को उसका अपहरण कर लिया गया।

उसके पिता ने थाने में अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करायी किन्तु कोई कार्यवाही नहीं की गयी। क्योकि वह किसी नेता, मंत्री, अफ़सर या स्टार की बेटी नहीं थी। न ही उसके पिता के पास किसी बड़े नेता या मंत्री का नम्बर था शायद यही कारण रहा होगा, वैसे मेरे कहने की बात नहीं है हर किसी को मालूम है हामरी न्यायिक व्यवस्था के बारे में गरीबों को कितना न्याय मिलता है सब जानते है। इसलिए उस बच्ची की जान की कीमत काफ़ी कम थी। अख़ाबरी भाषा में दुष्कर्म होना अपहरण होना आम बात है। इसलिए किसी समाचार पत्रोअम ने उसकी ख़बर छापना उचित नहीं समझा, देश के तो किसी बड़े समाचार पत्रों या न्यूजों चैनलों को तो पता भी नहीं की कही कुछ हुआ भी है।
Directory dubmission list  कुछ चार दिन बाद 29 म ई को कुछ छोटे समाचार पत्रों ने दो कालम न्यूज बनाकर छोड़ दिया। क्योकि हर नैंसी निर्भया नहीं होती जिसे उचित न्याय मिले। अख़ाबरों के न्यूज के मुताबिक बच्ची के मौत से धर में मातम छाया हुआ है‌।

जबकि तिलयुगा नदी के किनारे मिली बच्ची के शव को देखकर आपकी चेतना शून्य हो जाये आप शायद जड़ चेतन में समा जाये। वाह रे हमारा देश वाह रे हमारा समाज़।
बहुत खूब कितनी अच्छी न्यायिक प्रणाली है हामरे देश की।

ख़ैर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जैसा आरोपी चाहते थे उसकी बुआ की शादी न हो तो शादी रुक गयी है। जो हाथ मेंहदी लगवाने के लिए स्कूल से लौट रहे थे उन्हे गला दिया गया। क्या सिर्फ़ बच्ची की मौत माता-पिता के लिए काफ़ी नहीं थी जो तेजाब से जला डाला गया।

क्या यही है बिहार का सुशासन संकल्प, सुशासन बाबू नीतीश कुमार को जनता ने जिस उददेश्य के लिए गद्दी पर बिठाया था। नैंसी को न्याय चाहिए JUSTICE FOR NANCY


आरोपियों को क्या सजा मिलनी चाहिए कमेन्ट बाक्स में अवश्य बताये, इस पोस्ट को शेयर करे ताकि नैंसी को न्याय मिल सके।



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