इंग्लैण्ड जैसा भिख़ारी देश कैसे बना समृद्ध, इंग्लैण्ड की लुटेरी रानी की असलियत - शब्दबाण

शब्दबाण

सकारात्मकता का संदेशवाहक सबसे तेज ! सबसे आगे !

Saturday, 13 May 2017

इंग्लैण्ड जैसा भिख़ारी देश कैसे बना समृद्ध, इंग्लैण्ड की लुटेरी रानी की असलियत

SABDBAN


भूख़मरी, बेरोज़गारी, और दलदलों, तथा जंगलों से धिरा हुआ हुआ एक देश जो आगे चलकर इंग्लैण्ड कहलाया। एक समय ऐसा था जब लंदन को सबसे गंदे राज्य का दर्जां दिया जाता था। इंग्लैण्ड जैसे देश में लोग बेरोजगारी और भूख़मरी से मर रहे थे। खाने के लिए न भोजन था न रहने के लिए धर लोग भोज़न के नाम पर जंगली फ़लों को आहार बनाकर ख़ाते थे। और कपड़ों के नाम पर पत्तें आदि पहनकर धूमते रहते थे।
  इंग्लैण्ड़ के लोग आशिक्षित एवं बेरोजगार होने के साथ-साथ बहशी प्रवृति के थे। झुग्गी,झोपड़ियों मे रहने वाले लोगों के धरों मे टूटी चरपाई होती थी। धुआ से पूरा धर एकदम जंगलों जैसा प्रतीत होता था, जिसमे एक दिन भी रह पाना असंभव था। लंदन जैसा राज्य सबसे गंदा राज्य था। लोग हैजा, फ़्लेग जैसी बीमारियों से पीड़ित थे न अस्तपताल थे न डाक्टर न ही दूर-दूर तक कोई चिकित्सिय सुविधा। जंगलों मे खादानों से टीन और सोना निकलता था तथा महासागरीय तट पर मोती। यह स्थिति आज से सात हजार वर्ष पूर्व की है।जब अतलान्त सागर की लहरों‌ने उसकी पट्टी को लील लिया था।‌
 उस क्षेत्र का नाम‌ भी तब यूरोप नही था।‌ एतिहासिक काल में देखा जाये तो वह २५० वर्ष पूर्व रियासतों के पिण्ड़ का एकमात्र हिस्सा था। यदि भारत की बात की जाये तो भारत हजारों वर्षों से एक राष्ट्र रहा है जिसके अनेकों साक्ष्य प्रमाण के रुप में‌ मिल जायेंगे। ईसापूर्व ३२०० बर्ष में, जब भारत वर्ष में अनेकों राजा महाराज तेजस्वी, ओजस्वी सम्राट ज्ञान, बीरता, करुणा और आध्यात्म और ऐश्वर्य के तेजपुंज मे चमक रहे थे। उस समय ब्रिटेन जंगलों, दलदलों से भरा हुआ उजाड़ सा इलाका था कुछ बहेलिए और मछुआरे इधर-उर बसते थे। ईसा पूर्व २००० में जब भारत मे नन्दवंश, मौर्यां पांचालों के महान बैभवशाली राज्य थे और सोलह विशाल जनपद थे उस समय ब्रिटेन की कुल आबादी ४ हजार हुआ करती थी। वहा के लोग मरे हुए जानवर की हड्डियों तथा हिरन की सींगों से खु्दायी करते थे। 

 ईसा पूर्व ५०० वर्ष पहले वहाँ लोगों ने पहली बार खेती करना सीखा। तब वहाँ स्केंडिनोविया,से नाॅर्समेन और डेन तथा अन्य देशों से पिक्ट, स्काट आदि लोग आकर बसे जिन दिनों भारत में स्वर्ण युग था उस समय इंग्लैण्ड में केल्ट, टयूसन, सेक्सन, आदि जातियाँ जनगण बनाकर रह रहे थे और आपस में लड़रहे थे। भारत मे उन दिनों मिस्त्र तथा स्पेन से व्यापार था जिसके साक्ष्य खुदायी में मिलते है। 
लेकिन कोई भी यूरोपिय इतिहासकार इसकी चर्चा नहीं करता है। इंग्लैण्ड २०० वर्षों तक रोमनों का गुलाम रहा पाँचवी-छठी शती में गोथों, सेक्सनों जूटों की गुलामी इंग्लैण्ड ने वर्षों तक की। यह वह समय था जब भारत मे समद्रगुप्त, कुमार गुप्त और स्कन्दगुत्त आदि के वैभवपूर्ण राज्य थे। अश्वमेध यज्ञ हो रहे थे। कालिदास, महाकवि, आर्यभट्ट, बारहमिहिर, आदि गणितज्ञ और खगोलशास्त्री हो चुके थे। उस समय इंग्लैण्ड मे अत्यंत खराब सामाजिक दशा थी। तब वहाँ के लोग धनुष-बाण के बारे मे जानते तक नहीं थे। वहाँ धनुष-बाण का प्रचलन वाइकिंग वंश के योद्धाओं के समय हुआ, ८ वी शती तक इंग्लैण्ड में दर्जनों जातियों का कब्जा था तब आये दिन मारकाट होती रहती थी।

महामारियों‌ का दौर

१२ वी शती ईस्वी के आरम्भ में इंग्लैण्ड में ६ बड़े राज्य थे मर्सिया, नार्थम्ब्रिया, स्काटलैण्ड, वेल्स और ईस्ट एंग्लिया इसमें से हर कोई अपने को अलग-अलग राष्ट्र मानता था। चर्च के इशारे पर गाँव के गाँव जला दिये गये लोगों का उत्पीड़न किया गया नृशंस नरसंहार किया गया। इंग्लैण्ड के लुटेरें फ्राँस के लुटेरों से लड़ते रहे यह लड़ाई सौ वर्षों तक चली। इसी समय प्लेग नामक बीमारी फैली और लाखों‌ लोग काल‌ के गाल में समा गये। पहली बार होम्योपैथी दवा का प्रदुर्भाव हुआ एलोपैथी और आयुर्वेद के बारे में वहाँ लोगों को पता ही नही था। 

षड़यंत्र के अड्डे बने चर्च

ईसाइयत के प्रचार के साथ इंग्लैण्ड में कैथोलिकों और प्रोस्टेस्टों के मध्य भयंकर युद्ध और मारकाट शुरु हो गयी। चर्चों को षड़यंत्र का अडडा कहा जाये तो कोई अतिश्योक्ति नहीं है। चर्च के कठोर नियमों से लोगों का जीवन दुत्कर हो गया लोग भाग जाना चाहते थे। लोगों को बताया गया कि आगे जाओंगे तो अतल गहराई मे डूब जाओगे। तभी इतनी मे रेन्सां की लहर दौड़ गयी। मार्कोपोलों चीन व भारत धूमकर लौटा था उसने बताया कि दुनिया बहुत बड़ी है, इसके इतर भी सभ्य लोग और सभ्य समाज है।

लुटेरी रानी और कमीशन

मार्कोपोलो के किस्से धर-धर फैल गये। भारत की समृद्धियां फैली आवारा, उचक्के, चोर और डकैत, लुटेरे भारत में आने को मचलने लगे। इसके लिए रानी की अनुमति आवश्यक होती थी। रानी के अनुमति के बिना देश के बाहर जाना संभव नही था। इसके लिए रानी को शपथपूर्ण आश्वासना दिया गया कि लूट के माँल मे रानी को हिस्सा दिया जायेगा। अन्यथा उनके इंग्लैण्ड वापस आने पर रोक लगा दी जाती, इसी प्रकार लूट के माल में रानी का कमीशन तय हो जाता था।

इंग्लैण्ड के आईने में भारत

४०० साल पहले ही बाइबिल लिखी गयी थी, जिसे पादरी सिर्फ पढ़ते थे आम जनता को इसका उच्चारण करना मना था। पादरी भी अशिक्षित थे केवल शब्दों को मिलाकर उसका उच्चारण कर लेते थे, राजाओं को तथा कुछ पादरियों‌ को छोड़कर किसी को शब्दों का उच्चारण करना नहीं आता था। इंग्लैण्ड मे झूठा प्रचारित किया गया कि भारत में भी धर्म-शास्त्रों पर रो है, किन्तु उस समय भारत के हर धर में गीता, रामायण और कविदास, तुलसीदास रचित रामचरितमानस का पाठ होता था।

औधोगिक क्रान्ति के पूर्व इंग्लैण्ड़

१. ऐसा कहाँ जाता है कि समतामूलक व्यवस्था, पूँजीवाद और प्रबंध कौशल की और अनुसंधान की वजह से औधोगिक क्रांति हयी।
यह सब झूठा प्रचारित किया गया जब्कि सच्चाई कुछ और थी। भारत के इतिहास के बारें मे लोगों को झूठा बताया गया
भारत को गरीब अशिक्षित देश के रुप में प्रचारित किया गया जबकि भारत का गौरवशाली इतिहास रहा है।

२. औधोगिक क्रांति के समय तक केवल राजा और पादरी ही थोड़ा बहुत पढ़ना जानते थे। बाकी सभी निरक्षर थे।

३. इस समय तक भारत के गाँव-गाँव तक विधालय थे, एवं प्रवुद्ध शिक्षक थे। विजयनगर साम्राज्य तथा मुगल साम्राज्य दोनों वैभव पर थे, विधा के विराट केन्द्र थे उस समय तक केवल इंग्लैण्ड मे राजा और पादरी बाइबिल के उच्चारण पढ़ते थे।

४. पादरी स्त्रियों को जला रहे थे, लोगो बीमारी से पीड़ित थे, हैजा, प्लेग नामक बीमारी से इंग्लैण्ड जल रहा था।

http://www.sabdban.com/2017/03/blog-post_52.html?m=1

http://www.sabdban.com/2017/05/blog-post_81.html

संदर्भ-:
भारत के विकास की भावी दिशा
प्रो.कुसुमलता केडिया
पृष्ठ-: ६९-७५