मोगली गर्ल बंदरों‌ के बीच पली पढ़ी - शब्दबाण

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Thursday, 6 April 2017

मोगली गर्ल बंदरों‌ के बीच पली पढ़ी

फिल्मी दुनियाँ से दूर हकीकत की मोगली गर्ल वर्ष 2016 में जंगल बुक के नाम से आयी फिल्म द जंगल बुक जिसका निर्देशन जान फेवरिव ने किया था। यह फिल्म द डिज्नी वल्र्ड बैनर तले बनी थी । जिसमें एडवेन्चर्स के साथ-साथ एक छोटे़ से लड़के मोगली की कहानी दिखायी गयी थी, जो जंगल में शेरों के साथ रहता है और जंगली जानवरों के साथ अठखेलियाँ करता है, बन्दरोंं की भाँति एक ड़ाली से दूसरे ड़ाली पर उछल कूद करता था। इस फिल्म ने बच्चें बूढ़ों के साथ सभी वर्ग के लोगों का मनोरंजन किया था। हास्य और रोमांच से भरपूर फिल्म में मोगली के किरदार को हर कोई जानना और समझना चहता है। खैर वह तो एक फिल्म थी जो कल्पना पर आधारित थी लेकिन क्या सच में कोई मोगली हो सकता है।  इसका जवाब है हाँ आज हम आपको एक ऐसी सत्य धटना के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपको सोचनें पर मजबूर कर देगा कि मोगली फिल्म केवल कल्पना पर आधारित थी या सत्यकथा पर। यह धटना बहराइच (उत्तर प्रदेश) की है, कोई उसे मोगली गर्ल कहता है तो कोई वनदुर्गा विगत कुछ दिन पहले बहराइच के जंगलों में वास्तविक मोगली गर्ल पायी गयी है। विगत कुछ दिनों पहले बहराइच स्थित कतर्नियाँ धाट वन्य जीव प्रभाग में कुछ लकड़हारों ने ऐसी ही बिचित्र लड़की को देखा था जो बन्दरों के साथ नग्न अवस्था मे धूम रही थी। लकड़हारों के पास जाते ही बन्दरों ने मोगली गर्ल को  सुरक्षा धेरे में ले लिया और हमलावर हो गयें। किसी तरह लकड़हारे अपनी जानबचाकर भाग निकलने में सफल हो गयी इसके बाद कई बार इसी तरह वह बन्दरों के साथ जंगल मे देखी गयी धीरे-धीरे यह खबर आस-पास के गाँवों मे फैल गयी। ग्रामीणों ने उस जंगल गुड़िया के पास कई बार जाने का प्रयास किया किन्तु बन्दरों के हमलावर रुख लेते ही वे भागे खड़े होते थे। अन्त में ग्रामीणों द्धारा यह सूचना पुलिस विभाग को दी गयी। पुलिस विभाग ने ग्रामीणों के द्वारा चिन्हित स्थान पर कई बार खोजी अभियान चलाया किन्तु उन्हे सफलता नही मिली। 25 जनवरी की रात यूपी 100 की गाड़ी रात्रि 10 बजे गश्त के दौरान जंगल से गुजर रही थी।तभी पुलिस की नजर इस मोगली गर्ल पर पड़ी उन्होने कड़ी मसक्त के बाद मोगली गर्ल को बंदरों के बीच से छुड़ाकर धायल एंव बेहोशी की अवस्था में सीएचसी मिहींपुरवा मे भर्ती कराया बलिका काफी जख्मी थी। मिहींपुरवा में सुधार न होने पर जंगल गुड़िया को बहराइच जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया जहाँ काफी उपचार के बाद बालिका मे कुछ सुधार होता दिखा।
जिला अस्पताल के डाक्टरों ने बताया कि लड़की जानवरों की तरह व्यवहार कर रही है, ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि बालिका का पालन-पोषण बन्दरों के बीच मे हुआ है। जिससे उसके हाव-भाव बन्दरों जैसे हो गये हैं। वह न इंसानों की तरह बोल पाती है न ही इंसानी भाषा समझ पाती है। उसका पूरा व्यहार जानवरों जैसा है, प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि लड़की अस्पताल के डाक्टरों की टीम और नर्स को देखते ही गुर्राने लगती है। जिसकी वजह से डाक्टरों को मोगली गर्ल का इलाज करने में काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है अस्पताल में डाक्टरों द्धारा दिये गये खाने को बेड़ पर उलटकर वह बन्दरों जैसे चुन-चुन कर भोजन ग्रहण करती है यह है असली मोगली गर्ल की कहानी।
बालिका किसकी है, उसका आशियाना कहाँ है, कहाँ से आयी है, कौन है यह अभी भी रहस्य और कौतुहल का बिषय बना हुआ है । क्योकि न उसकी भाषा इंसानों जैसी है न ही व्यहार, यह थी जानवरों की बीच पली बढ़ी वास्तिक मोगली गर्ल की कहानी।
A young girl found among monkey