चिंता और अवसाद से कैसे बचे (tension and anxiety) - शब्दबाण

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Saturday, 1 April 2017

चिंता और अवसाद से कैसे बचे (tension and anxiety)

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है ।  इसलिए प्रत्येक मनुष्य के आस-पास करुणा, दया, मोह, लोभ,अहंकार आवरण रुपी परतें विघमान हैं । जो मनुष्य को समय-समय पर परेशान करती रहती है 
मनुष्य आज के समय मे वासना, उन्मुक्तता, व्यसन आदि के व्यधानो मे उलझा हुआ है, मोह का पाश चाहे वह पुत्र-मोह हो या मातृ-पितृ रुपी मोह हो सामाजिक या आर्थिक मोह हो हमे अवसाद और चिंता के दलदल मे ले जा रहे हैं ।
मनुष्य आज के आधुनिकतावादी युग मे दुनियाँ की सारी सुख-समृद्धी को अपने वश मे कर लेना चाहता है, वह पंक्षी की भाँति उड़ना चाहता है, लेकिन सवाल यह उठता है कि वह जिस शान्ति की तलाश मे सुकून के तलाश मे आज इतना भागदौड़ कर रहा है क्या इससे उसको शान्ति मिल रही है, शायद नही फिर वह कौन सी शान्ति के लिए इतना दौड़े रहा है
जिसका कोई अंत नही, हम आज जिस शान्ति के लिए इतना जद्दोजहद कर रहे हैं सही मायने मे वही हमारी चिन्ता और अवसाद के कारण है ‌।
चिन्ता ऐसी मनःस्थिति है जो किसी न किसी रुप मे हर मनुष्य को परेशान करती रहती है ।कुछ लोगों को तो दिन-रात इतनी चिन्ता होती है कि वह रात मे ठीक से सो भी नही पाता है ।
चिन्ता चिता के समान होती है जो मनुष्य को चिता मे सुला कर ही दम लेती है, चिंता मनुष्य को अन्दर से सुलगाती रहती है, अंदर से खोखला करती रहती है । चिंता घुन की भाँति हमे अन्दर से खोखला करती रहती हैं और हमारी अन्दर की ऊर्जा का क्षरण करके हमें कमजोर और निकम्मा बना देती है ।

चिन्ता होने के कारण-:

१) कुछ को स्वयं की चिन्ता रहती है, परिवार की अपने भविष्य की चिंता रहती है ।
२) कुछ को अपनी की गयी गलतियों को लेकर चिंता रहती है ।
३) कुछ को अपने भविष्य को‌ लेकर चिंता रहती है, एंव दूसरे की समृद्धी को लेकर चिंता रहती है ।
४) कुछ को अनजानी, अनचाही चिंताए धेरे रहती है ।
चिंता मे एक तरह के नकारात्मक विचार मनुष्य को धेरे रहते है, और वह धीरे-धीरे और बड़े होते जाते है । चूँकि चिंता का आधार वास्तविक और अवास्तविक होते है, इसलिए लगातार चिंता करते रहने से मानसिक ऊर्जा का क्षरण होता रहता है । कभी-कभी मनुष्य इसकी वजह से अपने मानसिक विचारों से कमजोर और दुबला पतला होता चला जाता हैं ।

चिंता या अवसाद के लक्षण -:

१) असमय बाल का सफेद हो जाना , उनका झड़ना क्योकि चिंता की वजह से मस्तिष्क पर जो दवाब पड़ता है उसकी वजह से रसों व हर्मोन्स का स्त्रवित होना कम हो जाता है, जो हमारे रोम छिद्रो और बालो से जुड़े होते है ।
२) चेतना या याददाशत का कम हो जाना
३) हमेशा मन मे नीरसता का भाव रहना
४) lack of confidence आत्मविश्वास मे कमीं हो जाना आदि ।
एक बार जब किसी व्यक्ति को चिंता धेर लेती है तो उसकी सोच-सोच कर परेशान होने की मनःस्थिति बन जाती है, उसे आसानी से बदल पाना असंभव हो जाता है । चिंता करने वाला व्यक्ति चाह कर भी इस समस्या से ऊबर नही पाता है, यह सच हैं कि चिंता करने से किसी समस्या का समाधान नही हो जाता है ।
बल्कि इसके वजह से कोई भी समस्या और बड़ी प्रतीत होने लगती है, कभी-कभी तो चिन्ता वास्तविक जगत मे प्रकट होने लगती है ; क्योकि चिंता करने से व्यक्ति अधिक तन्यमयता से नकारात्मक विचारो को सोचता हैं, अपने मस्तिष्क के काल्पनिक चित्रण मे उस धटना को धटित होते देखता है और उसके धटित होने की कल्पना करने लगता है ।
इस तरह उस धटना को वास्तविक जगत मे धटित होने के लिए पर्यात्त ऊर्जा और सहमति उस व्यक्ति के माध्यम से मिल जाती है । चिंता करने वाला व्यक्ति अपने नकारात्मक सोच  के नकारात्मक परिणामों की संभवना से हमेशा व्यथित रहता है ।

चिंता और अवसाद से बचने के उपाय-:

अक्सर मनुष्य चिंता व अवसाद से जकड़े रहने के कारण अनेको गलत गतिविधियाँ करता रहता है, जिसे abnormal activity कह सकते है, समाज के लोग इस धटना को देखकर मनोवैज्ञानिक डाक्टर से सलाह लेने की बात करते है, किन्तु मनोवैज्ञानिक डाक्टरो के पास भी इस समस्या का समाधान नही होता है । न ही मनोवैज्ञनिक डाक्टर से सलाह लेने पर इस समस्या का समाधान हो पाता है।
हाँ इतना जरुर है कि वह कुछ दवाइयाँ देकर आपके मनःस्थिति को केन्द्रित करने का प्रयास करता है, आपका कौंसलिंग करके आपको इस नकरात्मकता के दलदल से बाहर निकालने का प्रयास करता है । लेकिन यह उपाय उतना कारगर और लम्बी अवधि का नही है ।
इस समस्या से निकलने का उपाय और समाधान हमारे आस-पास ही मौजूद है जिसे हम नकारात्मक विचारो के आवरण की वजह से देख नही पाते है । हम स्वयं दृढ़ निश्चय करके एंव कुछ उपाय करके इससे बाहर निकल सकते है, क्योकि यह स्थिति हमने स्वयं बनायी है इसलिए इस समस्ता का समाधान डाक्टर के पास नही स्वयं हमारे पास है ।
(व्यस्त रहे, मस्त रहे )
इसको एक कहानी के माध्यम से समझते है,
एक व्यक्ति को अपने जीवन मे दो बार मानसिक सदमे से गुजरना पड़ा, पहली बार तब जब उसकी पाँच साल की बेटी संसार से चली गयी, उसे और उसकी पत्नी को लगा वह इस विपत्ती को सह नही पायेंगें । किन्तु ईश्वर की कृपा से दस माह बाद पुनः उसे लड़की की प्रात्ति हुईं वह भी पाँच दिनो बाद संसार से विदा हो गयी । यह दूसरा मानसिक सदमा एक बेटी के वियो का था  जो उसके लिए असहाय हो गया । इस धटना के बाद उसके स्नायु तंत्र झकधोर गये उसने खाना-पीना छोड़ दिया, कभी आराम से नही रह सका ।


तभी उसे यह बात समझ आयी कि जिस कार्य को करने मे जुझारुपन और सोच-विचार की अवश्यकता हो, उस कार्य को करने मे चिंता नही होती वह यह समझ गया कि नाव बनाने की व्यस्ता ने उसके ऊपर नकारात्मक विचारों को हावी नही होने दिया और चिंता को समूल रुप से उखाड़ कर फेक दिया अतः उसने आजीवन व्यस्त रहने का निश्चय किया ।
वास्तव मे चिंता व्यक्ति को तभी होती है जब वह खाली बैठा होता है, उसके पास करने के किए कोई महत्वपूर्ण कार्य नही होता है । खाली समय मे चिंता करके वह अपनी परेशानियों, समस्याओं के बारे मे सोचने लगता है । जब्कि इसका समाधान है विवेकपूर्ण विचार करके, अच्छी किताबो का अध्ययन करके चिंता दूर करने के उपायों को सोचना और अपने द्धारा सोचे गये विचारो, योजानाओं पर कार्य करना । दुनियाँ मे बहुत सारे ऐसे कार्य है जिनको हर मनुष्य नही कर सकता और जिसे कर सकता है उसे ईमानदारी और तन्यमयता से करना ही इस समस्या का समाधान है ।
कार्य मे व्यस्त रहना वाला व्यक्ति ही जीवन की सार्थकता को, आराम करने के सूकून और आन्तरिक संतुष्टि को महसूस कर सकता है । इसलिए( व्यस्त रहो, मस्त रहो )यही सभी चिंताओं और अवसादों की समस्या का समाधान है ।
दोपहर के बाद जब वह व्यक्ति खिन्न बैठा था वह लड़का आया और नाव बनाने की जिद करने लगा, नाव बनाने की मनःस्थिति उस व्यक्ति की नही थी किन्तु बालहठ के सामने झुकना पड़ा । और उसने नाव बनाना शुरु किया उस खिलौना बनाए मे उसे तीन धण्ट़े लग गये  लेकिन एक बार भी उसके मन मे नकारात्मक विचार नही आये, नाव बन जाने के बाद वह असीम शान्ति का अनुभव कर रहा था जिसे महसूस करने के लिए वह पिछले कुछ समय से परेशान था लगातार डाक्टरो के चक्कर लगा रहा था ।
इसके बाद वह डाक्टरो के पास गया डाक्टरो ने उसे नींद की दवाईंयाँ थी किसी ने यात्रा करने का सुझाव दिया किन्तु उसे कोई फायदा नही हुआ । लेकिन उस व्यक्ति का एक चार वर्षीय बालक था उसने ही उसे इस समस्या से उबारने का कार्य किया, व्यस्त रहना ही (tension and Anixity ) से बचने का उपाय है ।


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