डियोड्रेंटस हैं या कोई वशीकरण मंत्र - शब्दबाण

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Tuesday, 7 March 2017

डियोड्रेंटस हैं या कोई वशीकरण मंत्र


पसीने की बदबू भी इतना बड़ा वरदान साबित होगी यह तो ऊपर वाले ने भी नही सोचा था जिसे ऊपर वाला अभिशाप समझकर पश्चाताप से धुला जा रहा था आज वही लोगो को अरबो -खरबो का टर्नॊवर दिये जा रहा है डियोड्रेंटस का उद्देश्य भले ही पसीने की बदबू को भगाने का रहा हो ,लेकिन जिस तरह से इसकी मार्केटिंग की जा रही है ,इसका कामदेव के वरदान से कम नही आका जा सकता है ,इन डियोड्रेंटस की जबरदस्त मार्केटिंग का ही असर है कि जिन्को पसीने का "प" तक नही आता था वह भी इससे तर हुए जा रहे है जिस तरह से इन्के विज्ञापनो मे इसका ग्लैमरस साइडिफेक्टस दिखाये जाते है उसे देखकर ही ऎसा लगने लगता है कि इस संसार की समस्त लड़कियो के लिए डियोड्रेंटस की तथाकथित हाट खुश्बू ही आकर्षण का एकमात्र कारण है इसके विज्ञापनो मे पसीने की बदबू दूर भगाने का नही बल्कि लड़कियो को पास बुलाने का इंतजाम किया होता है डियोड्रेंटस न हो गया हाई पावर का चुम्बक है ,जिससे लड़कियाँ आप के पास आना तो क्या आपको चबाना शुरु कर दे ,पता चलता है कि अंकल जी टाइप्ड शख्स अपनी पैदाइशी को लेकर पछताने लगते है कि काश हमारे जमाने मे भी यह करिश्माई लोमहर्षक ,मनमोहक ,पासखीचक यंत्र होता अपने बच्चो का चोरी छिपे डियोड्रेंटस लगाकर कभी कभी इधर -उधर मिस काल कर दिया करते है ,खैर बाॅलीवुड का कोई ही ऎसा सिक्सपैकिया होरो होगा जिसने इसका विज्ञापन न किया होगा ,शायद ही सनीलियोनी टाइप्ड कोई हीरोइन होगी जिसने इसको लगाकर विज्ञापनो मे तथाकथित मर्द के लिए अपनी तड़प न दिखायी हो , टीवी मे इसके विज्ञापन जिस रफ्तार से आते है ,उतनी रफ्तार से तो जून की गर्मी मे शरीर से पसीना तक नही आता है ,इस विज्ञापन की महिमा है कि जिन लड़कियो को डियोड्रेंटस की स्पेलिंग तक नही आती वह भी स्कूल जाने से पहले इसकी बौछार करना नही  भूलती ,इसको लगाने के बाद बंदा इस कदर आश्वस्त हो जाता है ,जिस प्रकार से मछुआरा समुद्र मे कोई बड़ा सा जाल ड़ालकर हो जाता है कि कोई न कोई मछली तो फसेगी ही ,खैर मछली फसे न फसे आदमी इसी कामबाण से धायल हुआ जा रहा है ,इसको लगाने के बाद बंदा पैराकमाण्डो की तरह सर्जिकल स्ट्राइक करने के लिए लैस हो जाता है ,डियोड्रेंटस से समाज मे इस कदर आशा की लहर फैली है मानो जीवन के सारे कष्टो का एकमात्र समाधान यही है ,


सारे प्रवचनो सारे बाबाओ ,सारे गुरुओ की कृपा मानो बस इसी डियोड्रेंटस से रुकी हुयी है अब तो हर इंसान की पहचान उसके नाम से नही इसके फ्लेवर से की जाने लगी है ,अब तो आँख बंद कर लो तब भी पता चल जाता है कि बगल से मिसेज शर्मा निकल गयी ,इसकी वलिहारी महिमा इसी बात से लगायी जा सकती है कि लोग अब महीने का बजट काजू ,बादाम से ज्यादा इसके लिए रख लेते है ,समाज मे भी अब उस बंदे को गिरी नजर से देखा जाने लगा है जो डियोड्रेंटस नही लगाये होता है लोगो का बस चले तो ऎसे लोगो को काले पानी का सजा देकर समाज से बाहर कर दे इसको न लगाने वाले जधन्य अपराध करते है इसलिए लोग आज भले ही खाना भूल जाये लेकिन कही जाने से पहले इसको
लगाना नही भूलते है ,मजे की बात तो यह है कि लोगो डियोड्रेंटस की दर्जनो शीशियाँ लगाने के बाद तन की बदबू को भले मार पा रहे हो लेकिन मन की बदबू बढ़ती चली जा रही है इसको लड़कियो के लिए वशीकरण मंत्र के रुप मे प्रयोग किया जा रहा है ,वैसे भी कम खतरा है समाज को इस जालिम महक से ,काश लोग समझ पाते की मजा तो तब है जब खुश्बू शरीर से नही आपके किरदार से आये ।