उत्तराखण्ड की जय बोल - शब्दबाण

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Monday, 27 March 2017

उत्तराखण्ड की जय बोल


कल कल करती नदियां यहां पर
पतित पावनी गंगे है।
दृश्य मनोरम फूलो की घाटी में पुष्प रंग बिरंगे है।
आयुर्वेद का ज्ञान दिया विश्व को बिन मोल
उत्तरखण्ड की जय बोल ।
देव धरा यह पावन भूमि,
धन्य हुआ जिसकी है मातृभूमि,
बच्चों पर स्नेह लुटाती है बिन मोल
उत्तराखण्ड की जय बोल ।
हिमालय की श्रृंख्ला, सुन्दरता की परिपाटी है,
अध्यात्म से लिपटी देवभूमि की माटी है।
साक्षी है जिसकी महिमा का इतिहास और भूगोल
उत्तराखण्ड की जय बोल।
दृश्य मनोरम, देवभूमि का
देवो की महिमा गाती है,
अध्यात्म गुरु यह जगत गुरु है।
विश्व प्रसिद्ध धाम यहां बिन निज बोल
उत्तराखण्ड की जय बोल।
वीरों की धरा यह बीरो की रणभूूमि
अमर शहीदों की है कर्मभूमि
पग पग यहां वीरो की धूल
उत्तराखण्ड की जय बोल।
देश की रक्षा के खातिर
धर धर से निकल पड़ती है वीरो की टोली
देश रक्षा मे लगा देती है प्राणो की बोली
लिए बिना माटी का मोल,
उत्तराखण्ड की जय बोल।

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