ईवीएम मशीन या परिवर्तन की गूँज - शब्दबाण

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Wednesday, 15 March 2017

ईवीएम मशीन या परिवर्तन की गूँज




खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचें ये कहावत तो सुनी थी मैने ,परन्तु यह कहावत यूपी के विधानसभा चुनाव मे चरित्तार्थ हो जायेगी ये कभी नही सोचा था , कहते है कि विनाश काले विपरीत बुद्धि अर्थात मनुष्य का विनाश काल जब स्वर्गिम होता है तब इंसान की बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है चाहे सतयुग मे रावण हो त्रेता युग मे कौरव हो या द्धापर मे कंस, अभी अभी हाल ही मे उत्तर प्रदेश मे संपन्न हुए राज्य विधानसभा चुनावो मे यही हाल सभी विपक्षी दलो का है जिस तरह से स्वायतता प्रात्त संस्था चुनाव आयोग एंव ईवीएम मशीन पर टिप्पणी की जा रही है इससे यह तो साफ हो गया है कि सभी दलो की बुद्धि या तो सरसो के खेत मे धास चरने गयी है या विनाशकाल मे बुद्धि विपरीत हो गयी है , पराकाष्ठता की सीमा पार करते इन दलो की मानसिकता इस कदर गिर गयी है कि विकास को छोड़कर बेचारे गधे पर राजनीति करने के बाद अब बेचारी मशीन पर राजनिति शुरु दिया है , गधा सोच रहा होगा चलो जान बची तो लाखो पायो अब गधा यूपी मे आने से भी कतराने लगा है सोच रहा है बोझा ढ़ो लेंगे वह सही है किन्तु इन नेताओ की काली जुबान से पीछा छूटा अब तो मशीन पर शामत आ पड़ी है ।
बसपा सुप्रीमो मायावती एंव दिल्ली राज्य के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का बयान यहाँ  पर गधे को थोड़ा राहत देता हुआ प्रतीत होता है ,गधा सोच रहा था बेचार वही दुनिया मे अकेला गधा है किन्तु अब उसे जानकर बहुत खुशी हो रही है और तरश भी आ रहा है नेताओ पर कि उन्से बड़े गधे तो ये नेता है  जो ईवीएम मशीन मे हैकिंग जैसी बात कर रहे है गधा भी सोचता है भगवान मुझे गधा ही रहने देते किन्तु थोड़ी सदबुद्धि इन देश के गधो को दे देते जिन पर राष्ट्र का एंव माँ भारती का बोझ है ,हम तो ठहरे गधे आखिर गधा तो गधा ही होता है ।
इलेक्ट्रिक वोटिंग मशीन पर मायावती एंव केजरीवाल का बयान यही सिद्ध करता है कि ढ़ाक के कितने पात
इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन पाँच मीटर केबल द्धारा जुडी दो यूनिट एक कंट्रोल यूनिट एंव एक बैलेट यूनिट से जुड़ी होती है कंट्रोल यूनिट पीठाशीन अधिकारी या मतदान अधिकारी के पास होती है बैलेटिंग यूनिट वोटिंग कम्पार्टमेंट के अन्दर रखी जाती है ,बैलेट पेपर जारी करने के बजाय कंट्रोल यूनिट का प्रभारी ,मतदान अधिकारी बैलेट बटन को दबाता है ।
1989-1990 मे विनिर्मित इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनो का प्रयोगात्मक आधार पर प्रयोग पहली बार नवम्बर 1988,मे आयोजित 16 विधानसभाओ के साधारण निर्वाचन मे प्रयोग किया गया इन सोलह विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रो मे मध्यप्रदेश मे 5 राजस्थान मे 5 एंव राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के 6 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र संहित थे , जहाँ विजली की संभावना नही होती है वहा यह मशीन छः वोल्ट के बैट्री द्धारा चलायी जाती है ।
ईवीएम को किसी भी तरह से हैक कर पाना असंभव है क्योकि इसमे किसी भी प्रकार का इन्टरनेट कनेक्शन का जाल नही होता है, एंव मतदान के कुछ समय पूर्व ही यह मशीने भारी सुरक्षा के मघ्य मतदान अधिकारियो को उपलब्ध करवायी जाती है जिसे मतदान अधिकारी के साथ ही साथ हर दल का पोलिंग एजेंट स्वयं वोट डालकर संतुष्टि कर लेता है कि वोट सही दलो को जा रहा है या नही , तो हैक करने की सारी संभावनाएँ यही क्षीण हो जाती है
पाँच राज्यो मे आये चुनावी परिणामो ने सभी दलो को हशिए पर लाकर खड़ा कर दिया है ,सभी दलो द्धारा ईवीएम मशीन
पर की जा रही राजनिति इन्के विक्षिप्त मानसिकता एका ही परिणाम है ,मायावती एंव केजरीवाल द्धारा दिया गया बयान कही से भी मर्यादित और संवैधानिक प्रतीत नही होता है इस तरह के बयान लोकतंत्र के गला धोटने जैसा है सत्ता के नशे मे चूर यह राजनेता अपनी जमीने खोते देखकर मतान्ध हो गये है क्योकि इन्हे धी हजम ही नही हो रहा है इसलिए विकास की मुख्यधारा से बाहर निकलकर देश की स्वतंत्र एंव स्वायतता प्रात्त संस्था पर दोषारोपण कर रहे है ,देश मे विकास की गंगा बहाने के लिए प्रतिबद्ध मायावती एंव विकास पुरुष केजरीवाल जी पुनः बैलेट पेपर पर चुनाव कराने की माँग कर रहे है यह उस छोटे से बच्चे को वहलाने जैसा है बात है जिसे बड़े होने पर लालीपाप चुसने की सलाह दी जाती है ,विकास पुरुष को अब कौन बताये कि आज पूरी दुनियाँ चाँद पर जा रही है और आप अभी भी वही विक्षिप्त मानसिकता वाली बैलेट पेपर की धिसीपिटी बात कर रहे है इससे यह तो स्पष्ट हो गया है कि आप लोगो की मानसिकता विकास की है ही नही जिस बैलेट पेपर पर वोटंग की माँग की जा रही है वह भी पूरी तरह से निष्पक्ष नही है चुनाओ के दौरान अनेको बार बूथ कैपचरिंग एंव लूटपाट की धटनाएँ सामने आ चुकी है अब आप कहेंगे चलो पर्ची -पर्ची खेलते है ,
अब मेरा सवाल उन लोगो से है जो ईवीएम पर राजनिति कर रहे है देश मे ईवीएम मशीन से चुनाव का यह कोई पहला मामला तो है नही इससे पूर्व भी देश मे 1989-1990 से लेकर 7 बार लोकसभा चुनाव एंव 10 से अधिक बार विधानसभा चुनाव हो चुके है 2007  मे यूपी राज्य मे वसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार इसी ईवीएम मशीन द्धारा चुनाव से आयी थी , 2012 के विधानसभा चुनावो मे समाजवादीपार्टी को 224 सीटे प्रात्त हुयी थी और अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री चुना गया था साल  2015 मे हुए दिल्ली विधानसभा चुनावो मे केजरीवाल को 70 विधानसभा सीटो मे 67 सीटे प्राप्त हुयी थी तब इसी ईवीएम मशीन द्धारा विकास पुरुष की गंगा बही थी ,साल 2016, ,मे पश्चिमी बंगाल मे हुए विधानसभा चुनावो मे तृणमूल कांग्रेस को पूर्णबहुमत इसी ईवीएम मशीन द्धारा प्रात्त हुयी थी तब क्यो कोई विरोध के सुर मुखर नही हुए थे और न ही चुनाव आयोग पर कोई टिप्पणी की गयी थी ।
अगर अरविन्द केजरीवाल को ईवीएम मशीन पर संदेह है तो अभी इस्तीफा देकर मुख्यमंत्रीपद छोड़कर ,पुनः दिल्ली मे चुनाव करवाये इन सब बयानबाजी का ही परिणाम है कि जनता ने अब मौसम की तरह करवटे बदलना शुरु कर दिया है
बसपा सुप्रीमो द्धारा दिया गया बयान समझ मे आता है किन्तु एक आईआईटी का छात्र रहा नेता इस तरह के बयान दे तो यह उसके शैक्षिक योग्यता पर ही सवाल खड़ा करता है " कॊई निन्दोई कोई बन्दोई सिंधी स्वान रु स्यार किसी की निन्दा करने से या टिप्पणी करने से कोई समाधान नही निकलने वाला है अच्छा होगा अभी जनता ने नंगा नही किया है टिप्पणी छोड़कर विकास की रफ्तार पर ध्यान दो क्योकि अब सिर्फ जनता का काम बोलता है ,चुनाव आयोग एंव सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्था पर टिप्पणी की जा रही है इससे तो यह साफ हो गया है कि आपको देश की न्याय प्रणाली एंव संविधान पर ही विश्वास नही है ,अब आजादी के बाद का वह भारत नही है जिसे तुष्टिकरण ,लैपटाप और स्मार्टफोन जैसे लालीपाप देकर शासन सत्ता के सपने देखे जा सकते है ,जातिगत राजनिति से ऊपर उठकर देखो एक नया राष्ट्र एक नया भारत एक नया देश बाहे फैलाये इंतजार कर रहा है ,जहाँ न जातिपाति का बंधन है न लोभ ना कोई लालसा बस विकास, और माँ भारती का आँचल है जो आज पुनः  सिरमौर होकर पूरे विश्व मे जगत गुरु बनने का सपना देख रहा है ।
इन सब मुद्दो के बीच गधा का मुद्दा विकास के मुद्दे से काफी दूर निकल गया और जनता ने लोगो को स्वयं गधा बनाकर पाँच साल बोझ ढ़ोने को विवश कर दिया ,अब सिर्फ विकास चाहिए क्योकि जनता का काम बोलता है
जनता ने अपना स्पष्ट जनादेश दे दिया है अब वीर योद्धा की तरह अपनी हार स्वीकार कर लो और कुत्तो की तरह भौकना बंद कर दो क्योकि अब सिर्फ जनता बोलेगी ,और जनता का काम बोलेगा
बेहतर होगा अपनी नितियो और हार की समीक्षा कर पुनः लोकतंत्र के महापर्व मे आहुति डालने को तैयार रहे ।

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