मास्टर जी गजब कर गये - शब्दबाण

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Friday, 16 September 2016

मास्टर जी गजब कर गये

सरकार द्धारा चलायी जा रही मिड -डे-मील योजना पर एक हास्य व्यंग

कि चपरासी खीर के पतीले पर दंड पेल रहे है
हेड़ मास्टर रोटी बेल रहे है
सारे मास्टर मिलकर खाना परस रहे है देखो कैसे विधालयो मे शिक्षा के बादल बरस रहे है।
एक पत्रकार साहब बोले मास्टर जी अब सुबह सुबह राशन लाते है दिन भर उसे पकाते है शाम तक ठिकाने लगाते है फिर बच्चो को कब पढ़ाते है।
मास्टर साहब बोले पढ़ने और पढ़ाने
की चिन्ता तो हमे सताती है उससे बड़ी एक और चिन्ता हमे खायी जाती है ।
खाना अच्छा न बने तो अधिकारी तरह तरह के जाँचो के गोले दाग जाते है, और खाना अच्छा बन जाये तो खा-पीकर बच्चे धर भाग जाते है।
पत्रकार साहब बोले फिर आप मास्टर क्यू बने
मास्टर साहब बोले इसकी भी बहुत करुड़ कहानी है भाई
बचपन मे एक मास्टर था कसाई
हमारी खूब करता था कुटायी
वस्तुतः बदले की भावना उसी ने हममे भड़कायी 
मैने भी सोचा बड़े होकर हम भी  बनेंगें कसाई बच्चो की खूब करेंगें कुटायी
लेकिन भाग्य की विड़म्बना देखो भाई
मास्टर जी भी क्या खूब गजब कर गये
बदला लेने के लिए बडे हुए उससे पहले ही मर गये
अब शिक्षा और शिक्षण कार्य से कोसो दूर है स्कूल मे गणित वाले मास्टर के नाम से नही
खीर पूरी वाले मास्टर के नाम से मशहूर है
अब न कोई शिकवा है न कोई गिला है
ग्राम प्रधान के बाप की तेरहवी मे माल पुवा बनाने का ठेका जो मिला है ।

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