कल्पनिक भाई-बहन के मैराथन का दर्पण - शब्दबाण

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Monday, 16 May 2016

कल्पनिक भाई-बहन के मैराथन का दर्पण


थोडा व्यक्तिगत दृष्टिकोण है किन्तु यथार्थं सत्य है ...।
भाई-बहन -: यह रिश्ता मूल्यों की कसौटी की सबसे अहम कड़ी है। एक कहानी प्रचलित है कि जब कलावती ने हुमायु को राखी बाँधी थी तो हुमायु ने अपनी शत्रुता को भुलाकर अपने भ्राता कर्तव्य का पालन किया था। एवं अजीवन कलावती के रक्षा की सौगंध खायी थी। मूल्यों की कसौटी पर यदि इस रिश्तें का अवलोकन किया जाये तो यह रिश्ता कसौटी पर खरा उतरता है।
एवं  हुमायु ने आजीवन इस रिश्तें की पवित्रता को बनाये रखा था। आज के भाई बहन के रिश्ते स्वार्थं के लिए बनाये जाते है। जिसमे कामना का जल भरा होता है ..........आज कल भाई बहन बनाने की प्रतियोगिता चरम पर है .........इसके पीछे का रहस्य यह है। कि इसके पीछे प्रेम की तरंगे भी हिलोरे मारती है .....भाई कब प्रितम बन जाये समझे से परे है। मुझे कोई आपत्ति नही है।
 किन्तु समाज को दर्पण दिखाना हमारा कर्तव्य है,  आज न तो वो कलावती है न ही शीश अर्पण कर देने वाला भाई हुमायु जो इस रिश्ते की गरिमा को जीवंत बनाये रख सके।
रिश्तों का बोझ ढ़ोने से बेहतर है रिश्ते वही बनाओ जिसका
आप कुशलता पूर्वक निर्वहन कर पाओ ......हमने अनेकों
आर्टिफिशियल भाईयों को अपने कल्पनिक बहनों के प्रेम में
विधवा अलाप करते है देखा है। .....अपनी कल्पनिक बहनों के विरह में प्राण तक त्याग देते है। कल्पनिक भाई-बहन का रिश्ता समाज के लिए अत्यंत धातक है। एवं समाज में गलत सन्देश प्रेसित कर रहा है।
रिश्तों को निभाने की समझ जब नहीं है तो क्यू ऐसे रिश्ते
बनाये जाते है जिन्का निर्वहन न किया जा सके। समाज को
कलंकित करने से क्या मूल्य प्रात्त होता है....कल्पना शक्ति से
अपरिगामी सूचकाँक है। यह बात स्त्री पुरुष दोनों पर लागू होती है स्त्रिँया भी मैराथन में ज्यादा पीछे नही है यहाँ किसी एक पक्ष पर दोषारोपण करना उचित नही है।
भाई की संज्ञा उसे दो जो इस पवित्र रिश्तें की पवित्रता को
बनाये रख सके एंव इसका निर्वहन कर सके और बहन उसे बनाओ जो हर कसौटी पर उम्दा प्रदर्शन कर सके।
1.माता -पिता -: यदि आज हम इस संसार में स्वतंत्र विचरण कर रहे है।.....और स्वर्णिम युग के सुनहरे पलों को जीने का सौभाग्य हमे माता -पिता के माध्यम से ही प्रात्त हुआ है वस्तुतः यह रिश्ता अद्वैत अपरिगामी है ।
यहाँ इस रिश्तें पर मै टिप्पणी नही करुँगा .....वैसे यह रिश्ता भी आज आर्टिफिशियल हो गया है,  किन्तु हमारे दृष्टिकोण से अनमोल है।

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